Thursday, 18 April 2019

Practicum no 1


1-मेरे आदर्श महापुरुष

मेरे आदर्श महापुरुष पूज्य संत श्री असंग देव साहब जी हैं। असंग देव जी कबीर पंथी संत हैं।  इनका जन्म 20 अक्टूबर सन 1966 को ग्राम सहानियापुर जिला लखीमपुर खीरी में हुआ था। इनके पिता श्री महादेव प्रसाद एक साधारण किसान थे तथा माता श्रीमती पार्वती देवी अत्यंत शांत स्वभाव की धार्मिक महिला थी। इनकी माता जी का अधिकांश समय साधु संतों की सत्संग में व्यतीत होता था। असंग देव जी की बचपन से ही संत बनने की इच्छा उत्पन्न हुई इन्होंने कई सालों तक एक अच्छे गुरु की तलाश की लेकिन इन्हें अच्छा गुरु नहीं मिल सका कारण यह था कि यह जिस भी संत के पास जाते थे उनके अंदर किसी न किसी प्रकार का विषय भोग या फिर नशा व्यसन करते थे।  इस प्रकार यह उन्हें अपना गुरु नहीं बनाते थे।

                     
                      पूज्य संत श्री असंग देव जी
    बहुत समय तक गुरु की तलाश करते करते एक बार इनकी मुलाकात श्री क्षमा देव जी से हुई। क्षमा देव जी ने इन्हें गुरु मंत्र दिया।  श्री असंग देव जी का मुख्य उद्देश समाज में व्याप्त बाह्य आडंबर तथा अंधविश्वास को मिटाना और समाज में जो विभिन्न प्रकार के लोगों के बीच आपस में मनमुटाव ईर्ष्या दोष है उसको मिटा कर लोगों के अंदर प्रेम तथा विश्वास की भावना उत्पन्न करना और सबसे मुख्य बात यह है कि हमारे समाज में जितने भी प्रकार के नशा व्यसन व्याप्त हैं लोगों को उनसे छुटकारा दिलाना। गुरु मंत्र लेने के बाद असंग देव जी गांव गांव में जाते थे और जो भी व्यक्ति उन्हें नशा व्यसन करते या टाइम पास करते मिल जाते थे वह वहीं पर उन्हें समय के सही सदुपयोग तथा नशा से होने वाले नुकसान के बारे में अवगत कराते थे। और भविष्य में ऐसा ना करने का संकल्प भी दिलाते थे।

आज परम पूज्य श्री असंग देव साहब जी एक राष्ट्र संत हैं उनके कई आश्रम हैं। उनका प्रथम आश्रम गुरुधाम आश्रम मुस्तफाबाद लखीमपुर खीरी में है।  तथा दूसरा आश्रम कोटा राजस्थान में है और तीसरा आश्रम रायपुर छत्तीसगढ़ में है और एक आश्रम उज्जैन मध्य प्रदेश में है।  इन आश्रमों में दुर्बल दीन दुखी बेसहारा लोगों को की सेवा की जाती है।

असंग देव जी बचपन से ही वे अत्यंत कुशाग्र बुद्धि के थे। उनके घर में नियम पूर्वक रोज पूजा-पाठ होता था। कथावाचक बराबर इनके घर पर आते रहते थे।  परिवार के धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण के प्रभाव से असंग के मन में बचपन से ही धर्म और अध्यात्म के संस्कार गहरे होते गए। कभी-कभी वे ऐसे प्रश्न पूछते थे कि उनके माता-पिता और कथा वाचक पंडित जी तक चक्कर में पड़ जाते थे ।

वे केवल एक संत ही नहीं एक महान देशभक्त, वक्ता, विचारक, लेखक और मानव प्रेमी भी हैं।  उनका विश्वास है कि पवित्र भारतवर्ष धर्म एवं दर्शन की पुण्य भूमि है।  यह त्याग एवं समर्पण की भूमि है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि-
" यदि हम जीवन किसी को जीवन दे नहीं सकते तो किसी का जीवन लेने का अधिकार भी नहीं है एक बुद्धिमान प्राणी होने के नाते हमारा यह धर्म होता है कि हम अन्य जीवो का कल्याण करें ना कि उनका वध करें। ''
 वह पुरोहितवाद व धार्मिक आडम्बरों  के सख्त खिलाफ थे।  उन्होंने मानव सेवा ही ईश्वर की सेवा माना।  उनका कहना था कि -
" देश के भूखे दरिद्र कुपोषण के शिकार लोगों को देवी-देवताओं की तरह मंदिरों में स्थापित कर दिया जाए और मंदिरों से देवी देवताओं की मूर्तियों को हटा दिया जाए। "

आज लाखों की संख्या में लोग उनके उपदेशों को चुनते हैं तथा अपने जीवन को सही दिशा में अग्रसर करते हैं। टीवी में आस्था भजन चैनल पर रात 9:00 बजे से लेकर 9:20 तक उनका सत्संग प्रसारित किया जाता है जिसे करोड़ों की संख्या में लोग सुनते हैं और अपने जीवन को परिवर्तित करते हैं मुझे भी उन्हें सुनकर बहुत अच्छा लगा मैं अधिकांश समय पर उनके वीडियो देखता रहता हूं तथा उनके उपदेश सुनता हूं।


2- मेरा पसंदीदा स्थल (प्रभाष गिरि पर्वत, कौशांबी)

प्रभास गिरी पर्वत कौशांबी जिले के पभोसा नामक ग्राम में यमुना नदी  के किनारे स्थित है। यह पर्वत दिगंबर जैन तीर्थंकर श्री पदम प्रभु की तप एवं ज्ञान का क्षेत्र रहा है। यह पर्वत गंगा एवं यमुना नदी के बीच के दोआबा क्षेत्र का एकमात्र पर्वत है। गंगा और यमुना इन दोनों नदियों के बीच का जो दोआब क्षेत्र है उस क्षेत्र में प्रभास गिरी पर्वत ही एकमात्र पर्वत है इसके अलावा इस क्षेत्र में कोई पर्वत नहीं है।


यह पर्वत दिगंबर जैन धर्म के तीर्थंकर पदम प्रभु की तपोस्थली रहा है। पर्वत की तलहटी में दिगंबर जैन मंदिरों का निर्माण किया गया है यह पर्वत सामरिक रूप से ही नहीं बल्कि ऐतिहासिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। पर्वत के शीर्ष पर एक भव्य मंदिर बना है।
                    तीर्थंकर पद्मप्रभु की तपोस्थली

यह पर्वत रेल सेवा से इलाहाबाद- कानपुर मुख्य लाइन पर 35 किलोमीटर की दूरी पर भरवारी रेलवे स्टेशन से जुड़ा है।  यह पर्वत कानपुर से 160 किलोमीटर तथा इलाहाबाद से 70 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसके निकटवर्ती तीर्थ क्षेत्र कौशांबी 15 किलोमीटर तथा प्रयागराज 70 किलोमीटर की दूरी पर हैं।  इस पर्वत की सुंदरता में चार चांद लगाती हुई यमुना नदी पर्वत को स्पर्श करती हुई बहती है।
            पर्वत के शीर्ष तक पहुंचने के लिए सीढियां

पर्वत के शीर्ष तक पहुंचने के लिए उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा सीढ़ियों का निर्माण कराया गया है।  प्रकृति के मनोरम दृश्य की अनुभूति के लिए पर्वत की चोटी पर पहुंच कर इसका एहसास किया जा सकता है। यहां की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां जाने के लिए हर मौसम अनुकूल है।  उत्तर प्रदेश पर्यटन का यह एक मुख्य स्थल है। इस पर्वत की तलहटी में प्रत्येक वर्ष मकर संक्रांति के अवसर पर एक बड़े भव्य मेले का आयोजन किया जाता है।  इस मेले में दूर-दूर के लोग तथा दार्शनिक आते हैं और यमुना नदी में डुबकी लगाकर तीर्थंकर पदम प्रभु के दर्शन करते हैं तथा पर्वत पर चढ़कर वहां से प्राकृतिक दृश्य का और यमुना नदी का अवलोकन करते हैं।

3-मेरा बचपन

''बचपन हर गम से बेगाना होता है, बचपन का हर दिन खुशियों का खजाना होता है।।''
                         मेरे बचपन के कुछ पल

      बात कुछ ऐसी ही है मेरे भी बचपन की। मेरा नाम मनोज कुमार है मेरा बचपन मेरे अपने ही गांव छिलोलर पर व्यतीत हुआ। आज जब बचपन की याद आती है तो मन रुक सा जाता है बचपन में व्यतीत किए हुए उन पलों पर। हालांकि जब बचपन की बात होती है तो शरारत की बात भी होती है।  लेकिन मेरा बचपन शरारत भरा नहीं था मैं अपने मित्र मंडली में बहुत ईमानदारी, सरल और शांत भाव से रहा करता था। मैंने अपने ग्रुप में ऐसे मित्रों को रखें जो सत्य और इमानदार थे। चोरी या शरारत से हमारे बचपन का नाता कभी नहीं रहा और ना आज है। हमारा बचपन - "जो प्राप्त है वह पर्याप्त है।"  के सिद्धांत पर व्यतीत हुआ। मैंने अपने बचपन की पढ़ाई अपने गांव से ही पूरी की।
                        बचपन में बेर खाने जाना

बचपन के दिनों में साइकिल का टायर घुमाते घुमाते  बेर खाने जाना और खेतों में जाकर बेर तोड़ कर खाना बहुत पसंद था।  कभी-कभी तो खेतों पर घूमते घूमते बेर खाते खाते इतनी देर हो जाती थी कि समय पर स्कूल भी नहीं पहुंच पाते थे फिर दूसरे दिन विद्यालय पहुंचने पर कक्षा अध्यापक की डांट भी सुननी पड़ती थी। स्कूल की गर्मियों की छुट्टी में भैंस गाय भी चराने ने के लिए खेतों पर जाते थे और कभी कभी खेल खेलने पर इतने व्यस्त हो जाते थे कि भैंस और गाय गुम हो जाती थी तो फिर उन्हें घर में पता चलने से पहले भूखे-प्यासे ढूंढना पड़ता था। कभी-कभी ढूंढते ढूंढते तो पूरा दिन लग जाता था क्योंकि घर में मार पड़ने का डर बना रहता था।

                     बचपन का खेल गिल्ली-डन्डा
 
  मेरा बचपन गांव में बीता। हमारे गांव में इमली और बेल के अत्यधिक मात्रा में वृक्ष है। इन वृक्षों पर चढ़कर इमली तोड़ना और बेल तोड़कर खाना और मित्रों को खिलाना बहुत अच्छा लगता था। मेरा जन्म एक गरीब घराने में हुआ इसलिए मुझे ज्यादा भौतिक संसाधनों का साथ तो नहीं मिल सका, लेकिन प्रकृति की गोद ने जो जीवन के लिए जरूरी था वह सब कुछ दिया।
   मुझे अपने गांव के पेड़ पौधों खेत खलिहान तथा मिट्टी से इतना प्यार है कि मैं जब भी अपने गांव को छोड़कर कुछ दिनों के लिए किसी काम से बाहर जाता हूं तो उस मिट्टी की बहुत याद आती है जिसमें बचपन गुजारा था



4-मेरे प्रिय शिक्षक


श्री दया करण सिंह मेरे प्रिय शिक्षक हैं।  वे पूर्व माध्यमिक विद्यालय छिलोलर में पढ़ाते हैं।  शिक्षक एक माली के रूप में ना केवल पौधे रूपी विद्यार्थियों को पोषित करता है बल्कि उन्हें एक बेहतर मनुष्य के रूप में पल्लवित कर संस्कार रूपी पुष्प खिलाकर सद्गुणों की महक भी देता है।  हमारे मानसिक एवं सामाजिक स्तर को बनाने में शिक्षक का महत्वपूर्ण स्थान है।
 श्री दया करण करण सिंह पूर्व माध्यमिक विद्यालय के विज्ञान विषय के शिक्षक हैं। उस स्कूल में अनेक शिक्षक शिक्षिकाएं हैं जो बच्चों को अलग-अलग विषय ज्ञान देते हैं।  सभी शिक्षक बहुत अच्छे व सम्मानीय हैं। श्री दया करण सिंह बहुत सरल व परिश्रमी है।  वह बहुत ही अनुशासित और समय के पाबंद शिक्षक हैं।  वह अनुशासन को स्वयं के जीवन में लागू कर विद्यार्थियों के सामने उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।  वह कक्षा से संबंधित सभी कार्य और प्रोजेक्टों को देरी किए बिना सही समय पर पूरा कराते हैं।  मैं उन्हें बहुत पसंद करता हूं क्योंकि वह हमें पढ़ाने वा अच्छी चीजों को सिखाने के लिए अच्छी शिक्षा पद्धतियों का प्रयोग करते हैं।  श्री दया करण सिंह के अतिरिक्त वह हमारा चरित्र अच्छा बनाने के लिए अच्छी नैतिकता वाले आचरण को सिखाते हैं। उनकी दी गई शिक्षाएं हमेशा मेरे साथ रहेंगी तथा कठिन समय में हमें सही रास्ता दिखाएंगी।
  वह स्वभाव से बहुत अधिक विनम्र वह मृदुभाषी हैं। उनकी भाषा शैली उच्च कोटि की है। वह कमजोर तथा बुद्धिमान बच्चों में कोई भेदभाव नहीं करते हैं।  वह हमें हमेशा प्रोत्साहित करते हैं।  वह अपनी जिम्मेदारियों को अच्छे से निभाते हैं। वह सभी विद्यार्थियों से नम्रता से बात करते हैं।  वह नियमित रूप से कक्षा में उपस्थित होते हैं। सभी विद्यार्थी उनकी कक्षा में उपस्थित रहते हैं। तथा उनकी कक्षा लेने में रुचि रखते हैं।
वह हमेशा कुछ नया सिखाते हैं उनका व्यक्तित्व एकदम अलग है। वह सभी प्रकार के छल - दंभ - - पाखंड- झूठ और अन्याय से दूर रहते हैं। वह हमेशा कहते हैं कि - "सच्चा और सार्थक उपदेश वही है वाणी से नहीं बल्कि अपने आचरण के द्वारा प्रस्तुत किया जाता है"
 मैं आजीवन उनका ऋणी रहूंगा उनकी शिक्षाएं मेरे जीवन को हमेशा मार्गदर्शन करती रहेंगी
                              दयाकरण सिंह

                             5-  मेरा प्रिय मित्र                                 

मेरा प्रिय मित्र अरविंद कुमार है। अरविंद का गांव और मेरा गांव एक ही है। मैं और मेरे मित्र का बचपन साथ साथ गुजरा है हम दोनों प्राथमिक तथा उच्च प्राथमिक  की शिक्षा साथ-साथ प्राप्त किए हैं। अरविंद का स्वभाव अत्यंत सरल और सुशील है मेरे मित्र की रुचियां मेरी रूचियों से मिलती हैं जो मुझे पसंद होता है वह उसे भी पसंद होता है। कहा जाता है कि प्रेम विश्वास की नींव पर टिका होता है। जहां विश्वास की बात है तो मेरे मित्र का व्यवहार एक आदर्श प्रस्तुत करता है। उसके पिता पेसे से एक मजदूर हैं। मेरे और अरविंद के परिजन सभी एक दूसरे को जानते हैं। हमारी मित्रता बचपन से ही है हमारे विचार समान है हमारी मित्रता में स्वार्थ की भावना दूर दूर तक नहीं है  ।           

 अरविंद बहुत नम लड़का है  उसका उत्साह और आत्मविश्वास गजब का है। उसकी वाणी से नम्रता और शालीनता साफ झलकती है। उसे मैंने किसी भी व्यक्ति के साथ अभद्र व्यवहार करते नहीं देखा। खेल में क्रिकेट  हम दोनों का पसंदीदा खेल है। वह खेल में हारकर कभी उदास नहीं होता।
 वह समय का बहुत पाबंद है उसी ने मुझे समय का महत्व समझाया है। सच्चे मित्र की परीक्षा विपत्ति में होती है। अरविंद हमेशा मेरी सहायता करने के लिए तैयार रहता है। कहते हैं सच्चा मित्र ईश्वर का अमूल्य उपहार होता है । 

                     मैं और मेरा प्रिय मित्र अरविंद 

     अरविंद पढ़ाई में भी बहुत होशियार है उसने राजनीति शास्त्र  से m.a. किया है। अरविंद की भाषा शैली बहुत अच्छी है। वह हमेशा दूसरों की मदद के लिए तैयार रहता है वह कभी किसी से घृणा नहीं करता। अरविंद के दिल में हमेशा सभी के लिए प्यार रहता है।  हमारी सुबह की सैर से लेकर संध्या की चौपाल तक का समय एक साथ गुजरता है।

    अरविंद आत्मविश्वास से भरा रहता है वह हमेशा कुछ नया सीखने के लिए तैयार रहता है। वह हमेशा बड़ों का सम्मान करता है। वह हमेशा ही मेरी प्रेरणा का स्त्रोत रहा है। उसी के कारण आज मेरी आदतों में इतना बड़ा बदलाव आया है अगर वह मेरा मित्र नहीं होता तो शायद मैं इतना अच्छा नहीं हो पाता। सही मायने में वह मेरा सच्चा और प्रिय मित्र है वह सच्चा मित्र होने के साथ-साथ एक अच्छा भाई भी है मुझे अपनी मित्रता पर गर्व है।  वह हमेशा कहता है- "आप जीवन में भले ही कम मित्र बनाएं लेकिन मित्र वैसे बनाएं जो कभी भी मुसीबत में आपका साथ ना छोड़े।










Practicum no 3

 प्रस्तावना  प्रस्तुत एपिसोड में संदीप महेश्वरी द्वारा दी गई जानकारी बहुत ही महत्वपूर्ण है उन्होंने विद्यार्थियों को सफलता पाने की कई अच्छे -अच्छे तरीके बताएं हैं जिससे विद्यार्थी उन सभी तरीकों के माध्यम से अपनी राह पर आने वाली प्रत्येक समस्या का समाधान कर सकें। संदीप महेश्वरी यहां पर उस दवा के रूप में कार्य कर रहे हैं जैसे बीमार व्यक्ति के लिए औपचारिक दवा और अच्छी शिक्षा ग्रहण करने के लिए जिस प्रकार एक अच्छे शिक्षक की आवश्यकता होती है ठीक उसी प्रकार अन्य समस्याओं के समाधान के लिए संदीप महेश्वरी जैसा मार्गदर्शक होना जरूरी है इन सभी वीडियो में संदीप महेश्वरी विद्यार्थियों की सभी प्रकार की समस्याओं का समाधान बता रहे हैं जैसे किसी व्यक्ति को किसी वस्तु की लत लगना,घरेलू समस्याएं आदि का निराकरण किया है।
                                      
  • नाम – संदीप महेश्वरी(Sandeep Maheshwari)
  • जन्म – 28सितम्बर, 1980
  • उम्र – 32
  • कमाई – Images Bazaar वेबसाइट से
  • Images Bazaar का कुल मूल्य – लग भाग 11 करोड़ का कारोबार
  • पढाई – किरोरिमल कॉलेज, दिल्ली यूनिवर्सिटी
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Sandeep Maheshwari भारत के टॉप Entrepreneur की लिस्ट में हैं। संदीप महेश्वरी भारत के सबसे तेज़ उन्नति और सफलता प्राप्त करने वाले उद्यमी व्यक्तियों में गिने जाते हैं। वे Imagesbazaar.com के Founder और CEO हैं जो की भारतीय चीजों और लोगों से जुडी हुई चित्रों और फोटो का सबसे बड़ा ऑनलाइन संग्रह है।

इस वेबसाइट में 1 लाख से भी ज्यादा भारतीय मॉडलों के फोटो का संग्रह है और इस वेबसाइट के नेटवर्क के साथ 11 हज़ार से ज्यादा फोटोग्राफर जुड़े हुए हैं। बहुत ही कम मेहनत और अपने दिमाग के बल पर जल्द से जल्द सफलता पाने के कारण उन्हें दूसरे उद्यमी व्यक्तियों से अलग माना जाता है।
साथ ही वे अपने प्रेरणादायक “मुफ्त के जिंदगी बदल देने वाले सेमिनार” के कारण बहुत ही मशहूर हैं जिससे वे देश विदेश के जगह-जगह जा कर लोगों को प्रेरित करते हैं और प्रेरणा स्रोत बनते हैं।
अभी संदीप महेश्वरी का उम्र 36 वर्ष है (2019 में)। उन्होंने अपनी कॉलेज की पढाई अधूरी छोड़ दी। वे किरोरी मॉल कॉलेज जो कि दिल्ली उनिवेर्स्टी से जूडा हुआ है उसमें अपनी “बैचलर इन कॉमर्स” की पढाई कर रहे थे परन्तु कुछ निजी कारणों से वे आधी पूरी ना कर सके और उन्हें अपनी कॉमर्स की पढ़ी आधा में ही छोड़ना पड़ा।

                                                 एपिसोड विवरण  

 प्रथम एपिसोड   इस विडियो में संदीप महेश्वरी ने कम्युनिकेशन के बारे में बताया है। उन्होंने कम्युनिकेशन के लिये बताया है कि सबसे पहले अपने सामने वाले व्यक्ति को जानना बहुत जरुरी है। इस एपीसोड में संदीप जी ने बताया है कि संमाजस्य तभी हो सकता है जब हम दूसरे व्यक्ति की बातों को समझें तथा उनकी बातें सुनकर और अपने विचारों के बीच का रास्ता निकालें।  अपनी ही बातों को सही नही मानना चाहिए । बात-चीत के माध्यम से समस्या का समाधान निकालना चाहिए तभी हम किसी के साथ कम्युनिकेशन स्थापित कर सकते हैं। कम्युनिकेशन के लिए जरूरी है कि सामने वाला हमारी बातों में रुचि ले रहा है या नहीं। हमारा व्यवहार उसे अच्छा लगता है कि नहीं।  कम्युनिकेशन के लिए व्यक्ति में ईमानदारी होनी आवश्यक है।  हमें अपना-अपना ही नहीं करना चाहिए तथा बहस नहीं करनी चाहिए।  हमें अपनी ही बातों को साबित नहीं करना चाहिए दूसरे व्यक्ति के विचारों को भी सुनना चाहिए।  अगर हम ऐसा करते हैं, दूसरे के विचारों को सुनते हैं और अपने विचारों को भी उसके सामने रखते हैं तब हम सही मायने में सामंजस्य या कम्युनिकेशन स्थापित कर सकते हैं। 


                                       

द्वितीय एपिसोड  : एपिसोड में संदीप महेश्वरी ने सेल्फ कान्फीडेंस के बारे में बताया है। इन्होंने बताया कि आत्म विश्वास ऐसा होना चाहिये जो किसी काम को करने में बढ़ता ही रहे। इमानदारी से आत्मविश्वास बढ़ता है।  आत्म विश्वास बढ़ाने के लिए हमें स्वयं अपने आप को प्रेरित करना चाहिए। आत्म विश्वास के लिये  सबसे पहले किसी काम को पूरी इच्छा और अच्छे तरीके से समझना चाहिये।  किसी भी क्षेत्र में सफल होने के लिए उस क्षेत्र के बेसिक ज्ञान से लेकर पूरा ज्ञान होना चाहिये। निरंतर प्रयास हमारे आत्मविश्वास को बनाए रखता है। 
                                   
                                             
                                        
                              
 तृतीय एपिसोड :  इस एपिसोड में संदीप महेश्वरी ने हर चीज से सीखो,  इस विषय में बताते हैं कि हमें अपने रिश्ते और संबधों को कैसे मजबूत बनाना है।  इसमें उन्होने बताया है कि हमें अपनों का साथ कभी नहीं छोड़ना चाहिये।  हमें अपनों के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिये।  हमें अपने माता-पिता, भाई- बहन व यार दोस्त सबके साथ अच्छे सम्बन्ध स्थापित करना चाहिये। तभी हमारा और उनका अच्छा सम्बन्ध हो सकेगा।

                                         

                                                                                      
चतुर्थी एपिसोड इस एपिसोड में संदीप महेश्वरी ने हर चीज से सीखो के बारे में बताया है कि आलसी न बनो। उन्होंने बताया है कि जब हमारा शरीर आलसी हो जाता है तब उसके साथ-साथ हमारा मन भी आलसी हो जाता है जिसकी वजह से हमारे मन मष्तिक में नकारात्मक भाव पैदा हो जाते हैं। आज के समय में टेक्नालाजी हमें और आलसी बना रही है। इन्टरटेनमेंट के नाम पर हम आलसी होते चले जा रहे हैं। हमारी सोचने समझने की शक्ति कमजोर होती जा रही है हमें हमेशा शारीरिक तथा मानसिक व्यायाम करते रहना चाहिए जिससे हमारी सोचने की शक्ति हमेशा बढ़ती रहे। अतः हमें सदैव नियमित व्यायाम  करना चाहिये तथा सकारात्मक सोच विकसित करने का प्रयास करना चाहिये। 

                                   
                      
पंचम एपिसोड  :  इस वीडियो में संदीप महेश्वरी ने सन् 1938 के हंगरी आर्मी के कैरोलिना नामक व्यक्ति की कहानी के बारे में बताया है।  कैरोलिना उस कन्ट्री का बेस्ट शूटर था। वह अपनी कन्ट्री का नेशनल चैम्पियन था उसका सपना था कि वह 1940 के ओलम्पिक खेल में हिस्सा ले लेकिन एक अनहोनी से उसका शूटर  वाला हाथ बारूद का गोला फटने से एक दुर्घटना में चला जाता है।  इसके बावजूद भी वह अपने बाँये हाथ से निरन्तर कठिन  अभ्यास करता रहा  और 1948 तथा 1952 के ओलंपिक खेलों में गोल्ड मेडल जीता। अतः इससे हमें यह सीख मिलती है कि कठिन परिश्रम  से हम कुछ भी हसिल कर सकते है। 






                                             
  शैक्षिक उपादेयता 
  1. विद्यार्थी की  रुचि जिस क्षेत्र में हो उसे उसी क्षेत्र में जाने दिया जाए।जैसे किसी विद्यार्थी को शिक्षक बनने की इच्छा है तो उसे शिक्षक लाइन में ही भेजा  जाने दिया जाए।उसे डॉक्टरी ना पढ़ाई जाए।     
  2. विद्यार्थी को स्वतंत्र रूप से सोचने और समझने दिया जाए।                
  3. विद्यार्थी  के मन एवं मस्तिष्क पर अधिक जोर न दिया जाए।             
  4.  विद्यार्थी को पढ़ने के साथ-साथ खेलने का भी अवसर दिया जाए।      
  5.  यह  वीडियो बड़ी कक्षा जैसे 09,10 व 11,12 एवं स्नातक के विद्यार्थियों के लिए अधिक उपयोगी हैै।      

Practicum no 4

प्रस्तावना : प्रस्तुत एपिसोड में पंचतंत्र की कहानी का वर्णन किया गया है जो शिक्षा के क्षेत्र में बहुत ही लाभप्रद एवं विद्यार्थियों के जीवन के लिए बहुत ही उपयोगी है तथा इस कहानी से शिक्षा के क्षेत्र में बहुत ही अच्छी एवं प्रेरणादायक सीख मिलती है जिससे कि भविष्य में विद्यार्थी कोई भी कार्य करने से पहले उसके विषय में भली-भांति सोंच एवं समझ ले।जिससे कि उस कार्य को करने में कोई भी बाधा न आ सके तथा वह कार्य समय एवं सरलता से हो सके। 

                     पंचतंत्र की कहानी का विवरण एवं परिचय : 

संस्कृत नीतिकथाओं में पंचतंत्र का पहला स्थान माना जाता है। यद्यपि यह पुस्तक अपने मूल रूप में नहीं रह गयी है, फिर भी उपलब्ध अनुवादों के आधार पर इसकी रचना तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व  के आस- पास निर्धारित की गई है। इस ग्रंथ के रचयिता पं॰ विष्णु शर्मा है। उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर कहा जा सकता है कि जब इस ग्रंथ की रचना पूरी हुई, तब उनकी उम्र लगभग ८० वर्ष थी। पंचतंत्र को पाँच तंत्रों (भागों) में बाँटा गया है:
  1. मित्रभेद (मित्रों में मनमुटाव एवं अलगाव)
  2. मित्रलाभ या मित्रसंप्राप्ति (मित्र प्राप्ति एवं उसके लाभ)
  3. काकोलुकीयम् (कौवे एवं उल्लुओं की कथा)
  4. लब्धप्रणाश (हाथ लगी चीज (लब्ध) का हाथ से निकल जाना (हानि))
  5. अपरीक्षित कारक (जिसको परखा नहीं गया हो उसे करने से पहले सावधान रहें ; हड़बड़ी में कदम न उठायें)
मनोविज्ञान, व्यवहारिकता तथा राजकाज के सिद्धांतों से परिचित कराती ये कहानियाँ सभी विषयों को बड़े ही रोचक तरीके से सामने रखती है तथा साथ ही साथ एक सीख देने की कोशिश करती है।
 वीडियो का विवरण :दिये  एपिसोड 1से 15  में पंचतंत्र की कथा सीख से संबंधित है जिससे कि विद्यार्थियों को अपने विषय में अन्य चीजों को करने से पहले उसके विषय में अच्छी प्रकार से सोंच समझ लेना चाहिए उसकी जानकारी मिलती है। इसमें कहानियों का शरांश इस प्रकार है-
 इन कहानियों में से हमें यह सीख मिलती है कि धोका खाने वाला हमेशा धोका खाता हैं। मदद करने में छोटे बड़े का कोई फर्क नहीं पड़ता है। व हमें आपस में झगडा कभी नहीं करना चाहिए। व बुद्धि बल ही सबसे बड़ा बल होता है। तथा मूर्ख व्यक्ति को कोई पुरुष्कार नहीं मिलता है हमें जो मिले हमको उसी में खुश रहना चाहिये तथा प्रयास करने से हर मुस्किल का रास्ता मिल जाता है। हमें हमेशा एकता बना कर रहना चाहिए। झूठा अभिमान घातक होता है। बूंद बूंद से घडा भरता हैं। जब हमको कोई चीज न मिले तो हमें उसका तिरस्कार करना चाहिये तथा जो व्यक्ति को प्राप्त हो वही पर्याप्त होता है, वहीं  व्यक्ति को अपनी क्षमता को अनुसार दूसरे की मदद करनी चाहिए। 
वीडियो प्रदर्शन की झलकियाँ










                शिक्षण सहायक सामग्री के रूप में वीडियो का महत्व  

शिक्षण सहायक सामग्री  : सहायक सामग्री वह सामग्री है जो कक्षा में या अन्य शिक्षण परिस्थितियों में लिखित या बोली गई/दिखाई गई पाठ्य सामग्री जो समझने में सहायता प्रदान करती है। 
                                     
डेण्ड के अनुसार : '' कोई भी ऐसी सामग्री जिसके माध्यम से शिक्षण प्रक्रिया को उद्दीप्त किया जा सके अथवा दृश्यणेन्द्रिय संवेदनाओं के द्वारा आगे बढ़ाया जा सके वह सहायक सामग्री कहलाती है। "
                                               
                                 वीडियो का महत्व : 
        शिक्षण सहायक सामग्री में वीडियो का निम्नलिखित महत्व है।

1. छात्र वास्तविक पदार्थों को देख कर प्रत्यक्ष ज्ञान प्राप्त कर सकता है। 

2. यह अत्यंत उपयोगी एवं स्थाई ज्ञान प्राप्त करने वाला साधन है। 
3. इसके माध्यम से किसी पत्रिका एवं बुलेटिन  आदि को कम समय में व अच्छी प्रकार से समझा जा सकता है।  
4. इसके माध्यम से रेखाचित्र,चार्ट,मानचित्र,चित्र,मॉडल आदि को दिखाया जा सकता है।

वीडियो का परिचय : वीडियो  एक दृश्य-श्रव्य माध्यम का प्रकार है।जिससे विभिन्न प्रारूप के  छोटे या बड़े चलचित्रों का निर्माण किया जाता है तस्वीरों/फोटो को क्रम में दिखाकर जीवंत दृश्य का आभास किया जाता है और दृश्य के साथ श्रव्य का भी मिश्रण किया जाता है वीडियो को बनाने हेतु आधुनिक उपकरण सरलता से उपलब्ध हैं।

वीडियो की हाइपरलिंक https://www.youtube.com/playlist?list=PLbrRQqwQBqbxYhLHai65BlW0lijtOKFxa 
                                      
 
 वीडियो प्रदर्शन की कार्य योजना :  वीडियो प्रदर्शनी की कार्य योजना   बहुत ही सरल एवं सुबोध होती है यह किसी भी नुक्श पर बनाया गया सरल माध्यम से वीडियो होता है जो प्रकरण को आसान बना देता है तथा जिसके माध्यम से विद्यार्थी अधिक समय तक याद किए रहते हैं। 

                                         
अनुमति :  पूर्व माध्यमिक विद्यालय छिलोलर के प्रधानाचार्य से वीडियो प्रतियोगिता कराने के लिये पहले से मौखिक रुप से अनुमति लिया । प्रधानाचार्य जी ने मुझको किसी एक क्लास में विडियो दिखाने की अनुमति प्रदान कर दिये।
                                                      

निर्देश :  सभी विद्यार्थियों को वीडियो दिखाने से पहले उससे संबंधित सभी दिशा निर्देश (जैसे स्वच्छ एवं सुंदर लिखें, वीडियो को अच्छी प्रकार समझ कर प्रश्नों के उत्तर दें ,सभी प्रश्नों के उत्तर दें) तथा मौखिक रुप से छात्राध्यापक मनोज कुमार  द्वारा दिए गए।

                                        



प्रदर्शन  " वस्तु,शक्ति ,असंतोष ,ज्ञान आदि दिखलाने की क्रिया प्रदर्शन कहलाती है। "                                      
वीडियो टेस्ट परीक्षण में सभी विद्यार्थियों का  कार्य प्रदर्शन सराहनीय रहा तथा हम उन सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं। 

 शंका समाधान :  प्रतियोगिता समाप्त होने के बाद कुछ विद्यार्थियों की समस्याएं ( जैसे प्रतियोगिता के बाद क्या होगा ?अंक किस प्रकार दिए जाएंगे ?)आदि समस्याओं का समाधान किया  एवं उनके लिए कुछ सुझाव भी दिए।    






 प्रश्न पत्र : दिए गए एपिसोडओं को भली-भांति देखने एवं समझने के बाद प्रश्न पत्र प्रतियोगिता का एक प्रश्न पत्र तैयार किया जो अत्यंत सरल एवं सुबोध हैं। 

  अंक तालिका :   इस अंक तालिका में क्रमश: प्रथम,द्वितीय, तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के नामों की सूची एवं उनके अंकों को दर्शाया गया है। 


प्रथम - जया शर्मा। अंक- 20
द्वितीय - फुल्लो शुक्ला। अंक-19
तृतीय - राजबर्धन सिंह।  अंक- 18

 प्रथम स्थान :  इस वीडियो प्रतियोगिता में सभी  प्रतिभागी विद्यार्थियों छात्रा  जया शर्मा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया है।  अंक तालिका में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। 
 द्वितीय स्थान :  इस वीडियो प्रतियोगिता में   फुल्लो शुक्ला अंक तालिका में द्वितीय स्थान प्राप्त किया है। 
 तृतीय स्थान :  वीडियो प्रतियोगिता में राजबर्धन सिंह  अंक तालिका में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। 

 पुरस्कार वितरण :  पूर्व माध्यमिक विद्यालय छिलोलर में पुरस्कार वितरण  समारोह का आयोजन किया गया।जिसमें वहां के सभी शिक्षक गण एवं प्रधानाचार्या सामिल हुये।  इस  समारोह में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त विद्यार्थियों को क्रम अनुसार शील्ड प्रदान की गई। 





Practicum no 1

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