Thursday, 18 April 2019

Practicum no 4

प्रस्तावना : प्रस्तुत एपिसोड में पंचतंत्र की कहानी का वर्णन किया गया है जो शिक्षा के क्षेत्र में बहुत ही लाभप्रद एवं विद्यार्थियों के जीवन के लिए बहुत ही उपयोगी है तथा इस कहानी से शिक्षा के क्षेत्र में बहुत ही अच्छी एवं प्रेरणादायक सीख मिलती है जिससे कि भविष्य में विद्यार्थी कोई भी कार्य करने से पहले उसके विषय में भली-भांति सोंच एवं समझ ले।जिससे कि उस कार्य को करने में कोई भी बाधा न आ सके तथा वह कार्य समय एवं सरलता से हो सके। 

                     पंचतंत्र की कहानी का विवरण एवं परिचय : 

संस्कृत नीतिकथाओं में पंचतंत्र का पहला स्थान माना जाता है। यद्यपि यह पुस्तक अपने मूल रूप में नहीं रह गयी है, फिर भी उपलब्ध अनुवादों के आधार पर इसकी रचना तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व  के आस- पास निर्धारित की गई है। इस ग्रंथ के रचयिता पं॰ विष्णु शर्मा है। उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर कहा जा सकता है कि जब इस ग्रंथ की रचना पूरी हुई, तब उनकी उम्र लगभग ८० वर्ष थी। पंचतंत्र को पाँच तंत्रों (भागों) में बाँटा गया है:
  1. मित्रभेद (मित्रों में मनमुटाव एवं अलगाव)
  2. मित्रलाभ या मित्रसंप्राप्ति (मित्र प्राप्ति एवं उसके लाभ)
  3. काकोलुकीयम् (कौवे एवं उल्लुओं की कथा)
  4. लब्धप्रणाश (हाथ लगी चीज (लब्ध) का हाथ से निकल जाना (हानि))
  5. अपरीक्षित कारक (जिसको परखा नहीं गया हो उसे करने से पहले सावधान रहें ; हड़बड़ी में कदम न उठायें)
मनोविज्ञान, व्यवहारिकता तथा राजकाज के सिद्धांतों से परिचित कराती ये कहानियाँ सभी विषयों को बड़े ही रोचक तरीके से सामने रखती है तथा साथ ही साथ एक सीख देने की कोशिश करती है।
 वीडियो का विवरण :दिये  एपिसोड 1से 15  में पंचतंत्र की कथा सीख से संबंधित है जिससे कि विद्यार्थियों को अपने विषय में अन्य चीजों को करने से पहले उसके विषय में अच्छी प्रकार से सोंच समझ लेना चाहिए उसकी जानकारी मिलती है। इसमें कहानियों का शरांश इस प्रकार है-
 इन कहानियों में से हमें यह सीख मिलती है कि धोका खाने वाला हमेशा धोका खाता हैं। मदद करने में छोटे बड़े का कोई फर्क नहीं पड़ता है। व हमें आपस में झगडा कभी नहीं करना चाहिए। व बुद्धि बल ही सबसे बड़ा बल होता है। तथा मूर्ख व्यक्ति को कोई पुरुष्कार नहीं मिलता है हमें जो मिले हमको उसी में खुश रहना चाहिये तथा प्रयास करने से हर मुस्किल का रास्ता मिल जाता है। हमें हमेशा एकता बना कर रहना चाहिए। झूठा अभिमान घातक होता है। बूंद बूंद से घडा भरता हैं। जब हमको कोई चीज न मिले तो हमें उसका तिरस्कार करना चाहिये तथा जो व्यक्ति को प्राप्त हो वही पर्याप्त होता है, वहीं  व्यक्ति को अपनी क्षमता को अनुसार दूसरे की मदद करनी चाहिए। 
वीडियो प्रदर्शन की झलकियाँ










                शिक्षण सहायक सामग्री के रूप में वीडियो का महत्व  

शिक्षण सहायक सामग्री  : सहायक सामग्री वह सामग्री है जो कक्षा में या अन्य शिक्षण परिस्थितियों में लिखित या बोली गई/दिखाई गई पाठ्य सामग्री जो समझने में सहायता प्रदान करती है। 
                                     
डेण्ड के अनुसार : '' कोई भी ऐसी सामग्री जिसके माध्यम से शिक्षण प्रक्रिया को उद्दीप्त किया जा सके अथवा दृश्यणेन्द्रिय संवेदनाओं के द्वारा आगे बढ़ाया जा सके वह सहायक सामग्री कहलाती है। "
                                               
                                 वीडियो का महत्व : 
        शिक्षण सहायक सामग्री में वीडियो का निम्नलिखित महत्व है।

1. छात्र वास्तविक पदार्थों को देख कर प्रत्यक्ष ज्ञान प्राप्त कर सकता है। 

2. यह अत्यंत उपयोगी एवं स्थाई ज्ञान प्राप्त करने वाला साधन है। 
3. इसके माध्यम से किसी पत्रिका एवं बुलेटिन  आदि को कम समय में व अच्छी प्रकार से समझा जा सकता है।  
4. इसके माध्यम से रेखाचित्र,चार्ट,मानचित्र,चित्र,मॉडल आदि को दिखाया जा सकता है।

वीडियो का परिचय : वीडियो  एक दृश्य-श्रव्य माध्यम का प्रकार है।जिससे विभिन्न प्रारूप के  छोटे या बड़े चलचित्रों का निर्माण किया जाता है तस्वीरों/फोटो को क्रम में दिखाकर जीवंत दृश्य का आभास किया जाता है और दृश्य के साथ श्रव्य का भी मिश्रण किया जाता है वीडियो को बनाने हेतु आधुनिक उपकरण सरलता से उपलब्ध हैं।

वीडियो की हाइपरलिंक https://www.youtube.com/playlist?list=PLbrRQqwQBqbxYhLHai65BlW0lijtOKFxa 
                                      
 
 वीडियो प्रदर्शन की कार्य योजना :  वीडियो प्रदर्शनी की कार्य योजना   बहुत ही सरल एवं सुबोध होती है यह किसी भी नुक्श पर बनाया गया सरल माध्यम से वीडियो होता है जो प्रकरण को आसान बना देता है तथा जिसके माध्यम से विद्यार्थी अधिक समय तक याद किए रहते हैं। 

                                         
अनुमति :  पूर्व माध्यमिक विद्यालय छिलोलर के प्रधानाचार्य से वीडियो प्रतियोगिता कराने के लिये पहले से मौखिक रुप से अनुमति लिया । प्रधानाचार्य जी ने मुझको किसी एक क्लास में विडियो दिखाने की अनुमति प्रदान कर दिये।
                                                      

निर्देश :  सभी विद्यार्थियों को वीडियो दिखाने से पहले उससे संबंधित सभी दिशा निर्देश (जैसे स्वच्छ एवं सुंदर लिखें, वीडियो को अच्छी प्रकार समझ कर प्रश्नों के उत्तर दें ,सभी प्रश्नों के उत्तर दें) तथा मौखिक रुप से छात्राध्यापक मनोज कुमार  द्वारा दिए गए।

                                        



प्रदर्शन  " वस्तु,शक्ति ,असंतोष ,ज्ञान आदि दिखलाने की क्रिया प्रदर्शन कहलाती है। "                                      
वीडियो टेस्ट परीक्षण में सभी विद्यार्थियों का  कार्य प्रदर्शन सराहनीय रहा तथा हम उन सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं। 

 शंका समाधान :  प्रतियोगिता समाप्त होने के बाद कुछ विद्यार्थियों की समस्याएं ( जैसे प्रतियोगिता के बाद क्या होगा ?अंक किस प्रकार दिए जाएंगे ?)आदि समस्याओं का समाधान किया  एवं उनके लिए कुछ सुझाव भी दिए।    






 प्रश्न पत्र : दिए गए एपिसोडओं को भली-भांति देखने एवं समझने के बाद प्रश्न पत्र प्रतियोगिता का एक प्रश्न पत्र तैयार किया जो अत्यंत सरल एवं सुबोध हैं। 

  अंक तालिका :   इस अंक तालिका में क्रमश: प्रथम,द्वितीय, तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के नामों की सूची एवं उनके अंकों को दर्शाया गया है। 


प्रथम - जया शर्मा। अंक- 20
द्वितीय - फुल्लो शुक्ला। अंक-19
तृतीय - राजबर्धन सिंह।  अंक- 18

 प्रथम स्थान :  इस वीडियो प्रतियोगिता में सभी  प्रतिभागी विद्यार्थियों छात्रा  जया शर्मा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया है।  अंक तालिका में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। 
 द्वितीय स्थान :  इस वीडियो प्रतियोगिता में   फुल्लो शुक्ला अंक तालिका में द्वितीय स्थान प्राप्त किया है। 
 तृतीय स्थान :  वीडियो प्रतियोगिता में राजबर्धन सिंह  अंक तालिका में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। 

 पुरस्कार वितरण :  पूर्व माध्यमिक विद्यालय छिलोलर में पुरस्कार वितरण  समारोह का आयोजन किया गया।जिसमें वहां के सभी शिक्षक गण एवं प्रधानाचार्या सामिल हुये।  इस  समारोह में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त विद्यार्थियों को क्रम अनुसार शील्ड प्रदान की गई। 





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